आँखों को मूंद लेने से
खतरा न जाएगा….
वो देखना पड़ेगा जो
देखा न जाएगा….

छग आते ही कांग्रेस के प्रभारी ने फिर साफ किया सामूहिक नेतृत्व में अगला चुनाव लड़ेगी,सवाल ये है कि सचिन पायलट को बार -बार ये साफ क्यों करना पड़ रहा है? कारण साफ है मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने के बजाय कांग्रेस का नेतृत्व कौन करेगा?इस पर अक्सर अलग-अलग सुर सुनाई पड़ते हैं। कभी डॉ चरणदास महंत, टीएस सिंहदेव के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बात कहते हैं तो कभी रविंद्र चौबे,जनता की मांग पर भूपेश बघेल को नेतृत्व सौंपने की बातकहते हैं। ऐसे बयान से अध्यक्ष दीपक बैज असहज नजर आते हैं क्योंकि बैज की तारीफ खुद राहुल गांधीकर चुके हैं। पिछले दिन चौबे के बयान पर मचे बवाल के बाद भाजपा ने फिर कांग्रेस को गुटों में उलझी चमचों से भरी पार्टी कहकरतंज कसा जिस पर सचिन पायलट ने विराम लगाने की कोशिश की। पायलट ने बयान का पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने भी समर्थन किया।भाजपा बार-बार दोहराती है कि कांग्रेस किसी के भी नेतृत्व में लड़े कुछ नहीं होगा…? कांग्रेस का हर बड़ा नेता हारा और पिटा हुआ है। दरअसल,15 साल सत्ता से दूर रहने के बाद 2018 में पार्टी ने भूपेश बघेल के नेतृ त्व में बड़ी जीत हासिल कर सरकार बनाई, लेकिन उस जीत में टीएस बाबा और बाकी वरिष्ठ का साथ आना अहम रहा,नतीजा ढाई – ढाई साल के फॉर्मूले पर दिग्गजों के टकराव ने पार्टी की किरकिरी कराई।2023 में सत्ता से बाहर होने के बाद छग कांग्रेस में पहले दिन से नेतृत्व पर सवाल उठाए जाते रहे।जमीनी कार्यकर्तो तो छोड़िए,सीनि यर नेता तक,भूपेश या टी एस बाबा को नेतृत्व सौंपने की बात छेड़ते नजर आए। अब सवाल ये है कि क्या पायलट के बयान से कुछ फर्क पड़ेगा….?
नक्सली कमान देवजी को,
बस्तर हिडमा के हवाले…

छत्तीसगढ़ में मार्च 2026 यानि लगभग 6 माह के भीतर नक्सलियों के खात्मे की समय सीमा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तय की है,जल्दी ही केंद्रीय सुरक्षा बलों सहित छ्ग की सीमा से लगे राज्यों द्वारा संयुक्त अभियान चलाने की भी सहमति बन चुकी है वहीं नक्सली कॉडर बस्तर में नया नेतृत्व हाल ही में तय कर चुका है,नक्सली अपना अस्तित्व बचाने कीजुगत में हैं, सुरक्षाबल उनके खात्मे के लिये प्रयास कर रहा है, तेलंगाना के करीमनगर जिले के दलित तिरुपति उर्फ देवजी को नक्सल संग ठन ने नया मुख्य सचिव बनाया है,जिस पर 6 करोड़ का इनाम घोषित है।पीएल जीए बटालियन कमांडर हिड़मा उर्फ संतोष को विशेष आंचलिक समिति सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।छग में सुरक्षा बलों के अभियानों से रेड कॉरि डोर कमजोर पड़ता जा रहा है क्योंकि दर्जनों बड़े माओ वादी या तो मारे गए,आत्म समर्पण कर चुके हैं। ऐसे में संगठन नए नेतृत्व के सहारे बस्तर में अपनी पकड़ मज बूत करने,पुनर्गठन कोशिश कर रहा है,बस्तर में संगठन में बड़ा फेरबदल किया गया है,खबर है कि तेलंगाना के करीमनगर जिले के दलित नेता तिरुपति उर्फ देवजी को संगठन ने नया मुख्य सचिव बनाया है,इसी के साथ ही पीएलजीए की पहली बटालियन कमांडर हिड़मा उर्फ संतोष को विशेष आंचलिक समिति सचिव की जिम्मेदारी दी गई है,ये परिवर्तन बीते 21 मई को नारायणपुर जंगलों में हुई मुठभेड़ में महासचिव नम्बाला केशवराव उर्फ बसव राजू समेत 28 माओ वादियों के मारे जाने केबाद किया गया है। बसव राजू के उत्तराधिकारी देवजी की सुरक्षाबलों के उसकी प्रोफा इल बताती है कि उसने लंबे समय से नक्सलवादी संग ठनों से जुड़कर कई पदों में काम किया है। 70 साल का देवजी टिप्परी,तिरुपति उर्फ संजीव रमेश उर्फचेतन उर्फ कुम्मा, देवअन्ना, सुद र्शन जैसे तमाम नामों से जाना जाता है।तेलंगाना के करीमनगर का रहने वाला देवजी इससमय पोलित ब्यूरो का सदस्य भी है, 2018 में बसवराजू के पास महासचिव की कमांड थी,अबूझमाड़ के गुंडेकोट इलाके में बसवराजू मुठभेड़ में मारा गया जिसके बाद नेतृत्वहीन नक्सली संगठन विकल्प की तलाश में था।देवजी, मिलिट्री इंटेलीजेंस विंग का चीफ था,अलावा वो नसिर्फ पोलित ब्यूरो का सदस्य है, माना जाता है वो बहुत तेजी से फैसले भी लेता है,वैसे नक्सलियों में सबसे ऊपर पोलित ब्यूरो होते हैं जिनके निर्णय को सीसी मेम्बर (सेंट्रल कमेटी सदस्य)आगे बढ़ाते हुये डीकेएस जेडसी (दंडका रण्य स्पेशल जोनल कमेटी) सदस्यों तक पहुंचाते हैं।अब बात एक करोड़ के इनामी नक्सली माड़वी हिड़मा की,सबसे खूंखार नक्सली लीडरों में एक माना जाता है सुकमा के पूवर्ती में जन्मा हिड़मा बस्तर में नक्सलवाद की रीढ़ कहा जाता है,जिसे बटालियन कमांडर के पद से सेंट्रल कमेटी का सदस्य बनाया गया था,अब बढ़ा कर दंडका रण्य स्पेशल जोनल कमेटी का इंचार्ज बना दिया गया है।वैसे पहली बार किसीआदिवासी नक्सली लीडर के हाथ में इस तरह की कमांड सौंपी गई है।झीरमघाटी नरसंहार, ठहकवाड़ा और बुरकापाल जैसे बड़े हमलों का मास्टर माइंड रह चुके हिड़मा पर छग ने 45 लाख ₹ इनाम लगा रखा है।हिड़मा पर दूसरे राज्यों, सुरक्षा एजें सियों ने भी इनाम काऐलान कर रखा है कुल मिलाकर 1करोड़ के लगभग बैठता है सुरक्षा एजें सियों के पास हिड़मा की ताजा तस्वीर नहीं है नक्सलियों के बेहद सख्त सुरक्षा घेरे में रहता है और रणनीति बनाने में माहिर माना जाता है।
छग में बाघों की संख्या
17 से बढ़कर हुई 35…

छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या पिछले 3 वर्षों में दो गुनी हो गई है। 2022 में जहां बाघों की संख्या 17 थी,वहींअप्रैल 2025 के सर्वेक्षण में यह बढ़कर 35 हो गई।सीएम विष्णु देव साय की अध्यक्षता में छ्ग राज्य वन्यजीव कल्याण बोर्ड की 15वीं बैठक में बताया गया है। बैठक में बताया गया कि राजकीय पशु वनभैंसा की संख्या बढ़ाने के लिए विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।असम से लाए वनभैंसों की संख्या में वृद्धि हो रही है। राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना के संरक्षण हेतु भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।“मैना मित्र” नामक समूह का गठन किया गया है, जो मैना के संरक्षण, रहवास की निगरानी करता है।
पुलिस कमिश्नर सिस्टम,
7आईपीएस की कमेटी

राजधानी में 1 नवंबर से लागू होने वाली पुलिस कमिश्नर सिस्टम को लेकर तैयारी जोरों पर है। डीजीपी अरुणदेव गौतम ने वरिष्ठ एडीजी प्रदीप गुप्ता की अगुवाई में 7आईपीएस की विशेष समिति का गठन किया है।इस समिति मेंआई जी(नारकोटिक्स)अजय यादव,आईजी रायपुर रेंज अमरेश मिश्रा,आईजी (अअवि) ध्रुवगुप्ता,डी आईजी (दूरसंचार) अभिषेक मीणा,डीआई जी(सीसी टीएन एस) संतोष सिंह और एसपी (विआशा) प्रभात कुमार सदस्य के रूप में शामिल हैं।साथ ही,लोक अभि योजन संचालनालय के जेडी मुकुला शर्मा को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है।समिति का मुख्यकार्य पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली को छग पुलिस अधिनियम 2007 के अंत र्गत लाना है या अलग से नया कानून बनाया जाना है।यदि नया कानून बनाना जरूरी हुआ तो इसके लिए दो विकल्प होंगे, विधान सभा से अधिनियम पारित करना या राज्यपाल से अध्यादेश जारी कराना..? राज्य उत्सव के मौके पर रायपुर में इस प्रणाली को लागू करने के लिए अन्य राज्यों के मॉडल का अध्य यन कर सर्वश्रेष्ठ विधिक मसौदा तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। इस पहल से छत्तीसगढ़ पुलिस की कार्यप्रणालीऔर कानून -व्यवस्था व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
और अब बस…..
0 अभी तक डिप्टी सीएम अरुण साव, विजय शर्मा, ओपी चौधरी भारी थे, अब वन के साथ परिवहन विभाग मिलने के बाद केदार कश्यप भी भारी हो गये हैं…?
0छ्ग का पहला पुलिस कमिश्नर एडीजी रैंक का होगा या आईजी रैंक का ?
0 रावतपुरा सरकार मेडि कल कॉलेज के रिश्वतखोरी के मामले में सीबीआईद्वारा अदालत में दाखिल चार्ज शीट में पूर्व आईएफएस, भू-संपदा विनियामक प्राधि करण (रेरा) के अध्यक्ष संजय शुक्ला का नाम शामिल है,वे रेरा अदालत में धड़ल्ले से फैसले सुना रहे हैं।